चंद्रपुर मनपा कांग्रेस में गुटनेता विवादचंद्रपुर मनपा कांग्रेस में गुटनेता विवाद पर फैसला सुरक्षित, धनोरकर-वडेट्टीवार खेमों ने पेश किए दावे पर फैसला सुरक्षित, धनोरकर-वडेट्टीवार खेमों ने पेश किए दावे
चंद्रपुर: चंद्रपुर महानगरपालिका (मनपा) में कांग्रेस के गुटनेता पद को लेकर चल रहा लंबे समय से चला आ रहा आंतरिक सत्ता संघर्ष मंगलवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। सांसद प्रतिभा धनोरकर और विधायक विजय वडेट्टीवार के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुटों ने नागपुर में संभागीय आयुक्त के समक्ष अपने-अपने दावे पेश किए।
दोनों गुटों ने कांग्रेस के गुटनेता पद पर वैधता और बहुमत को लेकर अलग-अलग दावे किए। धनोरकर खेमे ने दावा किया कि मनपा में कांग्रेस के 27 पार्षदों में से 16 पार्षद उनके साथ हैं और मौजूदा गुटनेता राजेश अडूर अब बहुमत का समर्थन खो चुके हैं। गुट ने पार्षद सुरेंद्र अडबाले को नया गुटनेता मान्यता देने की मांग की।
वहीं, अडूर के नेतृत्व वाले वडेट्टीवार गुट ने दलील दी कि अडूर विधिवत निर्वाचित गुटनेता हैं। उन्होंने पार्टी व्हिप के बावजूद बैठक में अनुपस्थित रहने वाले 16 पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई और उनकी अयोग्यता की मांग की।
दोनों पक्षों ने अपने-अपने दस्तावेज और तर्क संभागीय आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए। सुनवाई के बाद आयुक्त ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
धनोरकर समर्थक पार्षद सुनील खंडेलवाल ने कहा कि दोनों पक्षों की दलीलें सुन ली गई हैं और आदेश बुधवार तक ई-मेल के माध्यम से जारी होने की संभावना है।
अडूर के करीबी और कांग्रेस पार्षद सचिन कात्याल ने कहा कि राजेश अडूर को सभी 27 कांग्रेस पार्षदों की सहमति से गुटनेता चुना गया था। उन्होंने बताया कि आधिकारिक नोटिस मिलने के बावजूद 16 पार्षद बैठक में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद अडूर ने उनकी अयोग्यता की मांग करते हुए संभागीय आयुक्त का दरवाजा खटखटाया।
यह विवाद कांग्रेस के भीतर धनोरकर और वडेट्टीवार खेमों के बीच लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता का नया अध्याय है। मनपा चुनाव में कांग्रेस 27 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन आंतरिक गुटबाजी के कारण वह महापौर, उपमहापौर और स्थायी समिति सभापति जैसे प्रमुख पद हासिल नहीं कर सकी। ये सभी पद भाजपा-नीत गठबंधन के खाते में गए।
हालिया संकट तब गहरा गया जब कथित तौर पर पांच पार्षद वडेट्टीवार खेमे से धनोरकर गुट में शामिल हो गए, जिससे शक्ति संतुलन बदल गया। 14 जून को अडूर द्वारा बुलाई गई बैठक में केवल 11 पार्षद शामिल हुए, जबकि अगले दिन 16 पार्षदों वाले धनोरकर गुट ने अलग बैठक कर अडूर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया।
इस बीच, कांग्रेस शहर अध्यक्ष शिवा राव ने कहा कि राजेश अडूर की नियुक्ति पार्टी हाईकमान के निर्देश पर हुई थी। हालांकि, हालिया घटनाक्रम के बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई नया निर्देश अब तक प्राप्त नहीं हुआ है।
अब सभी की नजरें संभागीय आयुक्त के फैसले पर टिकी हैं, जो न केवल मनपा में कांग्रेस के गुटनेता का भविष्य तय करेगा, बल्कि चंद्रपुर कांग्रेस की आंतरिक शक्ति-संतुलन की दिशा भी निर्धारित कर सकता है।
दोनों गुटों ने कांग्रेस के गुटनेता पद पर वैधता और बहुमत को लेकर अलग-अलग दावे किए। धनोरकर खेमे ने दावा किया कि मनपा में कांग्रेस के 27 पार्षदों में से 16 पार्षद उनके साथ हैं और मौजूदा गुटनेता राजेश अडूर अब बहुमत का समर्थन खो चुके हैं। गुट ने पार्षद सुरेंद्र अडबाले को नया गुटनेता मान्यता देने की मांग की।
वहीं, अडूर के नेतृत्व वाले वडेट्टीवार गुट ने दलील दी कि अडूर विधिवत निर्वाचित गुटनेता हैं। उन्होंने पार्टी व्हिप के बावजूद बैठक में अनुपस्थित रहने वाले 16 पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई और उनकी अयोग्यता की मांग की।
दोनों पक्षों ने अपने-अपने दस्तावेज और तर्क संभागीय आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए। सुनवाई के बाद आयुक्त ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
धनोरकर समर्थक पार्षद सुनील खंडेलवाल ने कहा कि दोनों पक्षों की दलीलें सुन ली गई हैं और आदेश बुधवार तक ई-मेल के माध्यम से जारी होने की संभावना है।
अडूर के करीबी और कांग्रेस पार्षद सचिन कात्याल ने कहा कि राजेश अडूर को सभी 27 कांग्रेस पार्षदों की सहमति से गुटनेता चुना गया था। उन्होंने बताया कि आधिकारिक नोटिस मिलने के बावजूद 16 पार्षद बैठक में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद अडूर ने उनकी अयोग्यता की मांग करते हुए संभागीय आयुक्त का दरवाजा खटखटाया।
यह विवाद कांग्रेस के भीतर धनोरकर और वडेट्टीवार खेमों के बीच लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता का नया अध्याय है। मनपा चुनाव में कांग्रेस 27 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन आंतरिक गुटबाजी के कारण वह महापौर, उपमहापौर और स्थायी समिति सभापति जैसे प्रमुख पद हासिल नहीं कर सकी। ये सभी पद भाजपा-नीत गठबंधन के खाते में गए।
हालिया संकट तब गहरा गया जब कथित तौर पर पांच पार्षद वडेट्टीवार खेमे से धनोरकर गुट में शामिल हो गए, जिससे शक्ति संतुलन बदल गया। 14 जून को अडूर द्वारा बुलाई गई बैठक में केवल 11 पार्षद शामिल हुए, जबकि अगले दिन 16 पार्षदों वाले धनोरकर गुट ने अलग बैठक कर अडूर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया।
इस बीच, कांग्रेस शहर अध्यक्ष शिवा राव ने कहा कि राजेश अडूर की नियुक्ति पार्टी हाईकमान के निर्देश पर हुई थी। हालांकि, हालिया घटनाक्रम के बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई नया निर्देश अब तक प्राप्त नहीं हुआ है।
अब सभी की नजरें संभागीय आयुक्त के फैसले पर टिकी हैं, जो न केवल मनपा में कांग्रेस के गुटनेता का भविष्य तय करेगा, बल्कि चंद्रपुर कांग्रेस की आंतरिक शक्ति-संतुलन की दिशा भी निर्धारित कर सकता है।



